Theme :
Home
Granth
eBook
Saint
Leelaye
Temple
Yatra
Jap
Video
Shanka
Health
Pandit Ji

पाप किसे कहते हैं विस्तार से बतायें?

क्या पुण्यों द्वारा पापों को भस्म किया जा सकता है? अपना मत शास्त्रानुसार दें|

  Views :2490  Rating :0.0  Voted :0  Clarifications :4
submit to reddit  
2723 days 15 hrs 33 mins ago By Balvinder Aggarwal
 

हरी ओम तत्सत :जीवन में किया वो हर मन,वचन,कर्म से किया हुआ कर्म जिससे किसी भी प्राणी मात्र का बुरा होता हो वोह पाप है

2785 days 11 hrs 53 mins ago By Jaswinder Jassi
 

PAAP... vo kirya hai jo smajj ko asshi nhi lggti aur smajj chahta hai ke ye koyi na krre....
PUUN... vo kirya hai jo smajj ko asshi lggti hai aur smajj chahta hai ke ye sbbi krre...
**JASSI**

2785 days 12 hrs 4 mins ago By Jaswinder Jassi
 

PAP kya HAI...?
ये दुनिया भगवान ने अपनी प्रकिती से बनवाई और प्रकीर्ति ही इससे चला रही है ] और
प्रकीर्ति ने जीवों की रचना अपनी प्रकीर्ति को चलाने के लिए की है न के किस्सी धर्मकर्म के कारेओ के लिए जीव(मानुष) पैदा किये हैं ] प्रकिरती के नौ मूल स्रोत हैं (सूरज, चाँद ,तारे, मिटी ,अग्नि ,पानी, वायु{हवा }, जी{मनं }, और आकाश{आवाज़ } मिटी-अग्नि - पानी वायु और आकाश के मुख स्रोत से कण निकल कर आपस में जुर्ते हैं और एक बॉडी (सरीर) की रचना होती है ] जे रचना जब से प्रकीर्ति होन्द में आई तब्ब से लगातार हो रही है ] जिस के कारण मुख स्रोतों में कम्मी आना लाजमी है अगर प्रकीर्ति उस कमी को पूरा नही करेगी तो एक सम्मे ऐसा आयेगा जब प्रकीर्ति में बॉडी ही बॉडी होंगी ]
इस लिए प्रकीर्ति ने बॉडी( तन्न ) के साथ मनं लग्गा कर जीवों की रचना कर दी , जीव क्या करते हैं ,सबबी प्रकार के जीव वस्तू (बॉडी/तन्न ) खुराक के रूप अपने सरीर के अंदर ले जाते हैं जीवों के सरीर के अंदर रर्सैनिक किर्या होती है जिस से वस्तु अपने मूल तत्व में टूट जाती है ,मल के रूप में जीव उस को सृष्टी बखेर देता है जो अपने मूल तत्व (पानी पानी में हवा हवा में मिटी मिटी में अग्नि अग्नि में और आकाश आकाश में मिल कर उन स्रोतों आई कम्मी को पूरा कर देते हैं ] मानुष का तिआगा मल पशु खा जाते हैं , पशुओं का तिआगा मल पक्षी खा जाते हैं और पक्षिओं की बीठ बनस्पति खाती है ]ये किर्या चारोँ प्रकार के जीव मिल कर लगातार करते रहते हैं ]
प्रकीर्ति ने जीवों की रचना केवल इस्सी लिए की हुई है , ये धर्म कर्म पाप पुन स्वर्ग नरक मानुष की अपनी रचना है और कुश नही ]
अब्ब विचारण की बात ये है के जीव निर्जीव की रचना में परमात्मा का रोल है ] किओके परमात्मा कोई वस्तु नही केवल ख़ाली स्थान जो के हर समय हर जगह मजूद रहता है , इस को कोई वस्तु नही कहा जा सकता मगर सभी वस्तुए इस के कारण इस के भीतर से ही दिखाई देती एक कण से ले कर ग्रेह तक इस के घेरे में हैं ] सबी इस में ही चल रहे हैं ] ये वस्तु से पहले बी होता है , वस्तू नज़र आते सम्मे ये वस्तु के चोगिर्द रहता है और जब वस्तु नही होती ये फिर बी व्ही पर होता है ] ये कही से नही आता और न ही कही जाता ] जीव निर्जीव वस्तुओं के कण इस में चल कर ही आपस में jur कर पंज तत्व वस्तुओं की रचना करते हैं ] सारी प्रकीर्ति सभी वस्तुए इस में टिकी हुई हैं और चल रही हैं >>>>>>>>> जस्सी

2788 days 18 hrs 53 mins ago By Diwakar Kushwaha
 

पाप और पुण्य ये वह पहलु है जीवन के जिनपर सभी प्राणियो का जीवन निर्भर करता है , सभी प्राणी कर्म करते हैं और ये कर्म दो प्रकार के होते हैं पुण्य कम और पाप कर्म और उन्ही कर्मो के अनुसार योनी प्रदान होती है अब प्रश्न यह है की पाप कर्म क्या हैं
मेरे विचार से किसी भी जीव को बिना किसी अनुपयुक्त चेष्टा(किसी को हानि) के दण्डित करना चाहे वह शब्दों के माध्यम से हो , चाहे धन के माध्यम से या फिर शरीर के माध्यम से वह पाप है और यदि हम किसी ऐसे के प्रति शक्ति अपनाते हो जिसने अनुपयुक्त चेष्टा की हो तो वह धर्म को समर्पित हमारा कर्म होगा जो हमे पाप का नहीं पुण्य का भागी बनाता है ----हरी ॐ तत्सत

 
Tags :
Radha Blessings



Click here to know more about Radha Blessings
Article
Latest Video
Opinion Topic
Latest Bhav
Spiritual Directory


Today Top Devotee [0]

Today Opinion Topic

हम अधिक अनुशासित कैसे बने?

Radhakripa on Mobile

This Month Festivals

Guru/Gyani/Artist
Online Temple
Radha Temple
   Total #Visiters :1381
Baanke Bihari
   Total #Visiters :305
Mahakaal Temple
   Total #Visiters :
Laxmi Temple
   Total #Visiters :248
Goverdhan Parikrima
   Total #Visiters :359
Animated Leelaye
Maharaas Leela
   Total #Visiters :419
Kaliya Daman Leela
   Total #Visiters :
Goverdhan Leela
   Total #Visiters :
Utsav
Radha Ashtami
   Total #Visiters :
Krishna Janmashtami
   Total #Visiters :
Diwali Utsav
   Total #Visiters :248
Braj Holi Utsav
   Total #Visiters :
eBook Collection
सभी किताबे
राधा संग्रह
ग्रन्थ
कृष्ण संग्रह
व्रज संग्रह
व्रत कथाएँ
यात्रा
Copyright © radhakripa.com, 2010. All Rights Reserved
You are free to use any content from here but you need to include radhakripa logo and provide back link to http://radhakripa.com